मुख्य
श्रमायुक्त (कें.)
संगठन जिसे
केंद्रीय
औद्योगिक
संबंध तंत्र
भी कहते हैं,
केंद्रीय
क्षेत्र में
मुख्य रूप से
सौहार्दपूर्ण
औद्योगिक
संबंधों को
बनाए रखने के
लिए
उत्तरदायी
सर्वोच्च
संस्था है।
भारत में
श्रमिकों के
संबंध में
अप्रैल, 1945 में
गठित रॉयल
कमीशन की
सिफारिशों
के अनुसरण
में रेल के
समाधान
अधिकारी और
रेल श्रमिक
पर्यवेक्षक
तथा श्रमिक
कल्याण
सलाहकार
जैसे पूर्व
संगठनों को
मिलाकर यह
संगठन बनाया
गया था। उस
समय, इस संगठन
को केंद्र
सरकार के
क्षेत्र में
आने वाले
औद्योगिक
स्थापनाओं
में
औद्योगिक
विवादों के
निवारण एवं
निपटान, श्रम
कानूनों को
लागू करना
तथा
कामगारों के
कल्याण को
बढ़ावा देने
का दायित्व
सौंपा गया
था। यह संगठन,
दिल्ली में
स्थित मुख्य
श्रमायुक्त (कें.),
बंबई,
कोलकाता और
लाहौर स्थित 03
क्षेत्रीय
श्रमायुक्त (कें.),
08 समाधान
अधिकारी और 18
श्रम
निरीक्षक को
मिलाकर एक
छोटे से
कर्मचारी
संगठन के रूप
में आरंभ
किया गया।
समाधान
अधिकारी और
श्रम
निरीक्षकों
को सहायक
श्रमायुक्त (कें.)
तथा श्रम
प्रवर्तन
अधिकारी (कें.)
के रूप में
पुन: पदनामित
किया गया। यह
संगठन आजादी
के पश्चात की
अवधि के
दौरान
श्रमिक
विधानों में
वृद्धि, देश
में
औद्योगिक
गतिविधियों
में वृद्धि
और संगठन के
दायित्वों
में वृद्धि
के कारण
कानपुर,
धनबाद,
मद्रास,
आसनसोल,
अजमेर,
हैदराबाद,
भुवनेश्वर
में
क्षेत्रीय
कार्यालय
तथा धनबाद
में उप मुख्य
श्रमायुक्त (कें.)
का कार्यालय
स्थापित
करके संगठन
को धीरे-धीरे
बढ़ाया गया।
बेहतर
समाधान,
निवारक
मध्यस्थता
तथा श्रम
कानूनों के
प्रभावी
प्रवर्तन की
दृष्टि से,
केंद्रीय
औद्योगिक
संबंध तंत्र
को और मजबूत
करने की
योजना को छठी
पंचवर्षीय
योजना में
अनुमोदित
किया गया।
इसके
परिणामस्वरूप,
वर्ष 1981-82 में
तीन और
क्षेत्रीय
कार्यालयों
को स्थापित
किया गया
जिनके
मुख्यालय
गुवाहाटी,
चण्डीगढ़ और
बंगलौर में
बनाए गए।
वर्ष 1987-88 में
सातर्वी
पंचवर्षीय
योजना के
दौरान तीन
क्षेत्रीय
कार्यालय
स्थापित किए
गए जिनके
मुख्यालय
अहमदाबाद, नई
दिल्ली और
कोचीन में
हैं। मौजूदा
अधिकारियों
तथा
कर्मचारियों
में से
अधिकारी और
कर्मचारी
पुन: आबंटित
करते हुए
वर्ष, 2005 में
उत्तरांचल
और
छत्तीसगढ़
में दो नये
क्षेत्रीय
कार्यालय
स्थापित किए
गए, जिनके
मुख्यालय
क्रमश:
देहरादून और
रायपुर में
स्थापित किए
गए।