कार्य
मुख्य श्रमायुक्त (कें.) संगठन के निम्नलिखित कार्य हैं :-
समाधान/मध्यस्थता के माध्यम से औद्योगिक विवादों का निवारण एवं उनका निपटान करना।
केंद्रीय क्षेत्र के अंतर्गत बनाए गए श्रम कानूनों और नियमों को लागू करना।
अर्द्ध न्यायिक कार्य
ट्रेड यूनियनों की सदस्यता का सत्यापन
विविध कार्य
औद्योगिक विवादों
का निवारण एवं निपटान
केंद्रीय औद्योगिक संबंध तंत्र केंद्रीय क्षेत्र की स्थापनाओं में निम्नलिखित के माध्यम से सद्भावपूर्ण औद्योगिक संबंधों को सुनिश्चित करता है :-
अ. विवादों का निपटान करने के उद्देश्य से औद्योगिक विवादों में हस्तक्षेप करना, मध्यस्थता करना और सुलह
करना।
ब. समझौतों और पंचाटों को लागू करना।
स. हड़ताल और तालाबंदी रोकने के लिए हड़ताल और तालाबंदी की परिस्थितियों में हस्तक्षेप करना।
श्रम कानूनों और इसके तहत बने नियमों को लागू करना
मुख्य श्रमायुक्त (कें.) संगठन का महत्वपूर्ण कार्य श्रम कानूनों एवं इनके अंतर्गत बने नियमों को लागू करना है। रेल, खादानें, बैंक, बीमा, मुख्य पत्तन, कंटोनमेंट बोर्ड, तेल तथा प्राकृतिक गैस कार्पोरेशन, इंडियन ऑयल, बी.पी.सी.एल., एच.पी.सी.एल., भारतीय खाद्य निगम सहित केंद्रीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मुख्य स्थापनाएं इसके अंतर्गत आती हैं। औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम के अंतर्गत उपर्युक्त स्थापनाओं के साथ-साथ केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रम इसके अंतर्गत आते हैं तथा उपदान संदाय अधिनियम के अंतर्गत उपर्युक्त सभी केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ-साथ एक से अधिक राज्यों में शाखाओं वाली संस्थापनाएं केंद्रीय क्षेत्र के दायरे में आती हैं।
केंद्रीय क्षेत्र में लागू अधिनियमनों के नाम
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 तथा इसके अंतर्गत खादानों, रेल, वायु परिवहन सेवाएं तथा गोदी एवं जेटी के लिए बनाए नियम
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम
ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम, 1970
समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976
अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1979
बोनस संदाय अधिनियम, 1965
बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986
उपदान संदाय अधिनियम, 1972
श्रम विधि (विवरणी, प्रस्तुति और रजिस्टर रखने से कतिपय संस्थानों को छूट) अधिनियम, 1988
भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन तथा सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996
भारतीय रेल अधिनियम, 1989 का अध्याय 6-क, रेल कर्मचारियों के लिए रोजगार के घंटों का विनियमन
औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946
प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 (खादान एवं सर्कस उद्योग नियम, 1963)
सेना अभियंता सेवाएं (एम.ई.एस.) ठेका श्रमिक विनियमन
केंद्रीय औद्योगिक संबंध तंत्र के निरीक्षण अधिकारी 14 अधिनियमनों के तहत केंद्रीय क्षेत्र की स्थापनाओं का निरीक्षण करते हैं। जब कभी आवश्यक हो, क्रैश निरीक्षण और कार्यदल निरीक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। सूदूर क्षेत्रों और दुर्गम स्थानों पर स्थित स्थापनाओं के निरीक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम, 1970, न्यूनतम मजदूरी, अधिनियम, 1948 तथा भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 जैसे लाभप्रद अधिनियमनों को लागू करने पर विशेष जोर दिया जाता है। निरीक्षण अधिकारियों को निदेश दिए गए हैं कि इन अधिनियमनों के अंतर्गत निरीक्षण लाभ उन्मुखी होने चाहिए। श्रम कानूनों के उल्लंघन पर सक्षम न्यायालयों में अभियोजन मामले/दावा मामले दायर किए जाते हैं। कुछ पेचीदा मामलों को छोड़कर, सभी अभियोजन मामले श्रम प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा संचालित किए जाते हैं।
अर्द्ध न्यायिक कार्य
केंद्रीय औद्योगिक
संबंध तंत्र के अधिकारी, विभिन्न श्रम अधिनियमनों के अंतर्गत निम्नलिखित अर्द्ध
न्यायिक कार्य करते हैं :-
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मुख्य श्रमायुक्त (कें.) |
भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन व सेवा शर्तें) अधिनियम के तहत महानिदेशक (निरीक्षण) (अब यह शक्ति उप मुख्य श्रमायुक्त (कें.) में से एक को प्रत्यायोजित कर दी गई है) तथा औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) अधिनियम और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी है। |
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उप मुख्य श्रमायुक्त (कें.) |
औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) अधिनियम के अधीन अपीलीय प्राधिकरण, ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) केंद्रीय नियम, 1976 के नियम 25(2) (फ) (क) तथा (ख) के अधीन प्राधिकरण |
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क्षेत्रीय श्रमायुक्त (कें.) |
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अधीन प्राधिकरण, ऐसे क्षेत्रीय श्रमायुक्त (कें.) जो किसी क्षेत्र के प्रमुख नहीं है, को ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण और लाइसेंसिंग अधिकारी तथा भवन तथा अन्य निर्माण कर्मकार, अधिनियम के तहत पंजीकरण अधिकारी, उपदान संदाय अधिनियम के तहत नियंत्रण अधिकारी, समान पारिश्रमिक अधिनियम के अंतर्गत प्राधिकरण, ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम, उपदान संदाय अधिनियम, समान पारिश्रमिक अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी, औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) अधिनियम के तहत प्रमाणन अधिकारी, एच.ओ.ई.आर. के अंतर्गत रेल श्रमिकों का पर्यवेक्षक |
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सहायक श्रमायुक्त (कें.) |
उपदान संदाय अधिनियम के तहत नियंत्रण प्राधिकारी, समान पारिश्रमिक अधिनियम के तहत प्राधिकरण तथा ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम के अंतर्गत लाइसेंसिंग अधिकारी, भवन तथा अन्य निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन तथा सेवा शर्तें) तथा अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन तथा सेवा शर्तें) अधिनियम के तहत पंजीकरण अधिकारी
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ट्रेड
यूनियनों की सदस्यता का सत्यापन
सामान्य सत्यापन
केंद्रीय श्रमिक संघ संगठनों के सदस्यों की अनुपातिक संख्या का सामान्य सत्यापन इस दृष्टि से किया जाता है कि इन संगठनों को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मेलनों, समितियों परिषदों इत्यादि में प्रतिनिधित्व दिलवाया जा सके। केंद्रीय श्रमिक संघ संगठन की सदस्य संख्या की गणना, संगठन से संबंद्ध पंजीकृत संघों के सदस्यों की संख्या को मिला कर की जाती है। केंद्रीय श्रमिक संघ संगठन वही है, जिससे संबंद्ध संघ कम-से-कम चार राज्यों में और चार उद्योगों में फैला हो और उनकी सदस्य संख्या 5 लाख हो। सरकार ऐसे ही श्रमिक संघ संगठन को ही मान्यता प्रदान करेगी। यह सत्यापन चार साल में एक बार किया जाता है।
बैंकों का
सांविधिक सत्यापन
निदेशक मण्डल में
कर्मकार-निदेशक नियुक्त करने के उद्देश्य से, वित्त मंत्रालय (बैंकिंग प्रभाग) के
अनुरोध पर मुख्य श्रमायुक्त (कें.) संगठन विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में कार्यरत
संघों की सदस्यता का सत्यापन करता है। यह सत्यापन राष्ट्रीयकृत बैंक (प्रबंधन और
विविध उपबंध) योजना, 1970 तथा सहयोगी बैंक (कर्मचारी निदेशक की नियुक्ति) नियम,
1974 में विहित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।
अनुशासन संहिता
के तहत सत्यापन
केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली स्थापनाओं में कार्यरत संघों के सदस्यों की आनुपातिक संख्या तय करने के क्रम में संघों की सदस्यता का सत्यापन अनुशासन संहिता के तहत और गुप्त मतदान द्वारा, स्थायी श्रम समिति के अप्रैल 1961 में आयोजित 19 वें अधिवेशन में यथा अनुमोदित, दो वर्ष के लिए बहु संख्यक संघ के रूप में मान्यता प्रदान करने के लिए किया जाता है।
प्रमुख पत्तनो
(पत्तन न्यासों और गोदी श्रमिक बोर्ड) में तदर्थ सत्यापन
पत्तन न्यासों और गोदी श्रमिक बोर्ड में 2 वर्ष की अवधि के लिए श्रमिक सीट आवंटित करने के प्रयोजन से भूतल परिवहन मंत्रालय से संदर्भ प्राप्त होने पर प्रमुख पत्तन न्यासों और गोदी श्रमिक बोर्डों में कार्यरत संघों की आनुपातिक सदस्य संख्या तय करने के लिए संघों की सदस्यता का सत्यापन किया जाता है।
श्रमिक कानूनों का प्रवर्त्तन
श्रम प्रवर्त्तन अधिकारी (कें.) विभिन्न कानूनों के अंतर्गत मूलरूप से निरीक्षक के रूप में काम करते हैं। मुख्य श्रमायुक्त (कें.) से लेकर सहायक श्रमायुक्त (कें.) के स्तर तक के अधिकारियों में भी निरीक्षक की शक्तियाँ निहित हैं, विभिन्न श्रम कानूनों के तहत अधिकारी अर्द्ध न्यायिक कार्य नहीं कर सकते।
केंद्रीय औद्योगिक संबंध तंत्र के अधिकारी विभिन्न श्रम कानूनों के तहत निरीक्षण करते हैं। इन नियमित निरीक्षण कार्य के अलावा केंद्रीय औद्योगिक संबंध तंत्र के अधिकारी श्रमिकों के लिए लाभप्रद विधानों को लागू करने पर विशेष ध्यान देते हैं तथा क्रैश कार्यक्रम और कार्य बल निरीक्षण जैसे निरीक्षण के विशेष अभियान चलाते हैं।